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Saturday, 1 June 2013

कुछ आँखें दिन रात रोती हैं, बिना गलती के सजा पाती हैं ! सोच कर देखते हैं उनकी पीढ़ा को तो लगता है मानवता कहाँ खो गई है इतना निर्दयी कैसे हो सकता है एक मानव ? निर्दोश आँखों को भी रुला रहा है !! 
जय हिन्द
आज हर व्यक्ति अपनी खुशी के लिये जी रहा है ! उस खुशी को पाने के लिये न जाने कितने अपनों को दुख दिया है ! वो कभी नहीं सोचता है ! परन्तु कुछ व्यक्ति सभी को खुश देख कर ही खुश रहते हैं !
धन्य ऍसा व्यक्तित्व
भ्रष्ट वरिष्ठ अधिकारियों के कारण उनके सहकर्मी भी मासूम जनता के साथ बरताव गलत कर रहे हैं!
सोच कर देखना घूशखोरो आपकी छवि क्या है समाज में ?
क्या कहते हैं व्यक्ति आपके बारे में ?
जल्द सुधार करो ...
कानून के नियमों में परिवर्तन होना परम आवश्यक है ! कर्मठ , सुयोग्य व्यक्ति इस विशेष कार्य में अपना योगदान अवश्य दें ! जिससे कि प्रत्येक नागरिक का सुलभ व स्वच्छ न्याय में विश्वास बढ़े !! 
जय हिन्द