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Sunday, 26 May 2013

न्याय की परिभाषा इतनी परिवर्तित हो चुकी है कि आज न्याय के नाम पर एक आम आदमी का मात्र शोषण होता है ! 
क्या करे एक आम आदमी किसे अपनी पीढ़ा से अवगत कराये, कहाँ जाये ! 
क्या निर्दोश को न्याय दिलायेंगे ?

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